संदेश

चल रे कांवरिया शिव के धाम

देवघर- भारत के झारखण्ड राज्य का एक शहर है। यह देवघर जिले का मुख्यालय तथा हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इसे 'बाबाधाम' नाम से भी जाना जाता है| यहाँ भगवान शिव एवं शक्ति का एक अत्यन्त प्राचीन मन्दिर स्थित है। हर सावन में यहाँ लाखों शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहाँ भारत के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री और पर्यटक आते  हैं, विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। इन भक्तों को 'काँवरिया' कहा जाता है।  शिव पुराण मे लिखा है ये मंदिर श्मशान मे है। परन्तु श्मशान नदी के तट पर होता है । जबकि देवघर के प्रांगण मे कुआ है! बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है। यहां शिव शक्ति के एक साथ दर्शन होते हैं! सुल्तानगंज   - भारत के बिहार राज्य के भागलपुर जिला में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह गंगानदी के तट पर बसा हुआ है। यहाँ बाबा अजगबीनाथ का विश्वप्रसिद्ध प्राचीन मन्दिर है। उत्तरवाहिनी गंगा होने के कारण सावन के महीने में लाखों क...

धर्म

 धर्म  कुछ समय पहले एक होटल पर चाय पीते समय धर्म पर ही चर्चा चल रही थी तब वहां पर एक सज्जन व्यक्ति बैठे थे पेशे से डॉक्टर थे! उन्होंने  कहा कि मैं किसी धर्म को नहीं मानता! तब उनसे पूछा गया कि आपके परिवार में कौन-कौन हैं! डॉक्टर साहब ने बताया कि हम पति-पत्नी और हमारे दो बच्चे एक बेटी और एक बेटा है! डॉक्टर साहब से पूछा गया आपकी बेटी और बेटे क्या करते हैं! डॉक्टर साहब ने बताया कि वह दोनों अभी पढ़ते हैं! लड़का ग्रेजुएशन कर चुका, लड़की अभी 12वीं में पढ़ती है! डॉक्टर साहब से पूछा गया कि जब आप पति- पत्नी घर पर नहीं होते तो बच्चों की देखरेख कौन करता है! डॉक्टर साहब ने कहा कि बच्चे  उम्र के उस दौर में है कि अपनी देखभाल स्वयं कर सकें! तब सवाल पूछने वाले ने कहा वाह, जी, वाह डॉक्टर साहब, बच्चों के इसी उम्र के दौर में  अपोजिट अट्रैक्शन (मेल- फीमेल आकर्षण) उत्पन्न होता है जो प्राकृतिक है और  इसी दौर में युवक युवतियां गलतियां कर बैठते हैं! लेकिन यहां पर ऐसा क्या है ऐसा कौन सा बंधन है कवच है या चारदीवारी है जो आपके बेटे और बेटी को एक छत, एक कमरा, एक चारपाई पर सोने की इजाजत...

जु़बान

     मैं इस सृष्टि संचालन का अभिन्न अंग हूँ! इस सृष्टि के सौरमंडल के, नवग्रहों में उपस्थित, पृथ्वी के केवल धरती भू-भाग पर पाए जाने वाले प्राणियों जैसे-: मानव, पशु, पक्षियों, जानवरों के मुंह में पाई जाती हूँ! मैं इन सभी प्राणियों के जीवन निर्वहन में इनका पेट भरने व सजातीय - विजातीय प्राणियों की आवाज व सांकेतिक भाषा के आदान-प्रदान को स्वर देकर सामंजस्य प्रदान करने की कोशिश करती रहती हूं! और इस धरती के प्राणी जन अपना पेट भरते ही एशो-आराम के ताने-बाने बुनने लगते हैं! इसी एशो- आराम के आशियाने से मैं मानव प्रजाति को पृथक कर प्रकृति की कुशल संरचना का वर्णन करती हूं! 👉नोट:- मैं जुबान हूं, मैं विश्व की समस्त मानव प्रजाति के मुंह में, एक समान रूप, 32 दांतो के अंदर रहकर, चपलता से दिलो-दिमाग के भावों को बया करने का काम करती हूं!! वर्तमान में ऐतिहासिक साक्ष्य अनुसार मानव की 9 प्रजातियां थी, जिसमें मानव की 8 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं! निक लान्गरिक के अनुसार 3 लाख साल पहले से 1- होमो निअंरथल्स - यूरोप, 2- डेनिसो वंश - एशिया 3-होमोइरेक्टस - इंडोनेशिया, 4 - होमो रेडिसियंस - म...

कड़ियां परंपराओं की

                    होली और  फूलडोल कार्यक्रम  होली का पावन पर्व है राजभवन पन्हौना से जुड़ी एक विशेष एवं प्राचीन परंपरा के अंतर्गत आता है फूलडोल कार्यक्रम.......... तालुकेदार स्वर्गीय रावत शिवरतन सिंह जी के दरबार राजभवन के प्रांगण में होली के शुभ अवसर पर सुबह से लेकर दोपहर तक चौपाल लगती थी! उस चौपाल में उस वक्त की नामचीन हस्तियों के साथ राज दरबारियों ,पुरोहित उपरोहितों के साथ समस्त ग्राम वासियों के साथ तालुकेदार भांग ठंडाई एवं जलपान के साथ रंग गुलाल अबीर फगुआ के साथ होली खेलते थे! रंग खेलने के पश्चात स्नान ध्यान कर उसी प्रांगण में प्रारंभ होता था पूजा-पाठ कार्यक्रम,  स्वर्गीय रानी साहिबा राजभवन पन्हौना के प्रांगण में उपस्थित शिव मंदिर में पूजन कर एक डोली में भगवान की प्रतिमा रखकर पूरी ग्राम सभा के  प्रत्येक गांव मे  बारात निकलती थी! यह बारात ग्राम सभा के प्रत्येक परिवार के प्रत्येक दरवाजे तक जाती थी और बारात का कारवां एक दूसरे से जुड़ता जाता था इसे ही फूलडोल कहते हैं ! यह परंपरा ग्राम सभा पन्हौना सिंहपुर अमेठी उत...

द्वापर युगीन महाभारत कालीन अहोरवा देवी

 द्वापरयुगीन ,महाभारत कालीन सिद्ध पीठ मां  अहोरवा  ममता मयी मां की पावन स्थली जो माताजी के नाम से "अहोरवा भवानी" प्रसिद्ध है !माता जी का दिव्य अलौकिक स्वरूप जलते दीपक की तरह प्राचीन पाषाण रुपी प्रतिमा में आज भी विद्यमान है!स्थानीय लोगों के अनुसार  मोक्ष दायिनी मां जीके 1 दिन में 3 स्वरूपों के दर्शन प्राप्त होते हैं !सुबह के समय बाल्यावस्था, दोपहर के समय युवावस्था और शाम के समय प्रौढ़ावस्था स्वरूप के दर्शन प्राप्त होते हैं ऐसा स्थानीय लोगों का विश्वास है! 👉उत्तर प्रदेश के वर्तमान जिला - अमेठी ,तहसील - तिलोई ब्लॉक - सिंहपुर के अंतर्गत ग्राम सभा पन्हौना से आदि शक्ति मां अहोरवा का पवित्र स्थल( अहोरवा भवानी) 1 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है! 👉जन श्रुति के अनुसार वर्तमान में जिस स्थान पर पन्हौना ग्राम स्थित है! द्वापर काल में उस स्थान पर राजा सगर की राजधानी थी! वहां पर राजा सगर का राज्य था! महाभारत के समय अज्ञातवास की यातना में द्रवित पांचो पांडव (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन ,नकुल, सहदेव )व द्रोपदी जंगलों में भटकते हुए यहां पधारे थे !और रात में यहीं विश्राम भी किया था! सुबह सभी...