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जु़बान

     मैं इस सृष्टि संचालन का अभिन्न अंग हूँ! इस सृष्टि के सौरमंडल के, नवग्रहों में उपस्थित, पृथ्वी के केवल धरती भू-भाग पर पाए जाने वाले प्राणियों जैसे-: मानव, पशु, पक्षियों, जानवरों के मुंह में पाई जाती हूँ! मैं इन सभी प्राणियों के जीवन निर्वहन में इनका पेट भरने व सजातीय - विजातीय प्राणियों की आवाज व सांकेतिक भाषा के आदान-प्रदान को स्वर देकर सामंजस्य प्रदान करने की कोशिश करती रहती हूं! और इस धरती के प्राणी जन अपना पेट भरते ही एशो-आराम के ताने-बाने बुनने लगते हैं! इसी एशो- आराम के आशियाने से मैं मानव प्रजाति को पृथक कर प्रकृति की कुशल संरचना का वर्णन करती हूं! 👉नोट:- मैं जुबान हूं, मैं विश्व की समस्त मानव प्रजाति के मुंह में, एक समान रूप, 32 दांतो के अंदर रहकर, चपलता से दिलो-दिमाग के भावों को बया करने का काम करती हूं!! वर्तमान में ऐतिहासिक साक्ष्य अनुसार मानव की 9 प्रजातियां थी, जिसमें मानव की 8 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं! निक लान्गरिक के अनुसार 3 लाख साल पहले से 1- होमो निअंरथल्स - यूरोप, 2- डेनिसो वंश - एशिया 3-होमोइरेक्टस - इंडोनेशिया, 4 - होमो रेडिसियंस - म...