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कड़ियां परंपराओं की

                    होली और  फूलडोल कार्यक्रम  होली का पावन पर्व है राजभवन पन्हौना से जुड़ी एक विशेष एवं प्राचीन परंपरा के अंतर्गत आता है फूलडोल कार्यक्रम.......... तालुकेदार स्वर्गीय रावत शिवरतन सिंह जी के दरबार राजभवन के प्रांगण में होली के शुभ अवसर पर सुबह से लेकर दोपहर तक चौपाल लगती थी! उस चौपाल में उस वक्त की नामचीन हस्तियों के साथ राज दरबारियों ,पुरोहित उपरोहितों के साथ समस्त ग्राम वासियों के साथ तालुकेदार भांग ठंडाई एवं जलपान के साथ रंग गुलाल अबीर फगुआ के साथ होली खेलते थे! रंग खेलने के पश्चात स्नान ध्यान कर उसी प्रांगण में प्रारंभ होता था पूजा-पाठ कार्यक्रम,  स्वर्गीय रानी साहिबा राजभवन पन्हौना के प्रांगण में उपस्थित शिव मंदिर में पूजन कर एक डोली में भगवान की प्रतिमा रखकर पूरी ग्राम सभा के  प्रत्येक गांव मे  बारात निकलती थी! यह बारात ग्राम सभा के प्रत्येक परिवार के प्रत्येक दरवाजे तक जाती थी और बारात का कारवां एक दूसरे से जुड़ता जाता था इसे ही फूलडोल कहते हैं ! यह परंपरा ग्राम सभा पन्हौना सिंहपुर अमेठी उत...

द्वापर युगीन महाभारत कालीन अहोरवा देवी

 द्वापरयुगीन ,महाभारत कालीन सिद्ध पीठ मां  अहोरवा  ममता मयी मां की पावन स्थली जो माताजी के नाम से "अहोरवा भवानी" प्रसिद्ध है !माता जी का दिव्य अलौकिक स्वरूप जलते दीपक की तरह प्राचीन पाषाण रुपी प्रतिमा में आज भी विद्यमान है!स्थानीय लोगों के अनुसार  मोक्ष दायिनी मां जीके 1 दिन में 3 स्वरूपों के दर्शन प्राप्त होते हैं !सुबह के समय बाल्यावस्था, दोपहर के समय युवावस्था और शाम के समय प्रौढ़ावस्था स्वरूप के दर्शन प्राप्त होते हैं ऐसा स्थानीय लोगों का विश्वास है! 👉उत्तर प्रदेश के वर्तमान जिला - अमेठी ,तहसील - तिलोई ब्लॉक - सिंहपुर के अंतर्गत ग्राम सभा पन्हौना से आदि शक्ति मां अहोरवा का पवित्र स्थल( अहोरवा भवानी) 1 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है! 👉जन श्रुति के अनुसार वर्तमान में जिस स्थान पर पन्हौना ग्राम स्थित है! द्वापर काल में उस स्थान पर राजा सगर की राजधानी थी! वहां पर राजा सगर का राज्य था! महाभारत के समय अज्ञातवास की यातना में द्रवित पांचो पांडव (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन ,नकुल, सहदेव )व द्रोपदी जंगलों में भटकते हुए यहां पधारे थे !और रात में यहीं विश्राम भी किया था! सुबह सभी...